कैसे अजनबी रास्ते हैं।
कैसे अजनबी रास्ते है।
कैसे अजनबी रास्ते है ,
जो मंजिल मे साथ चलकर,
अधूरे में छोड़ जाते हैं ।
यहांँ किसको कहें अपना -अपना।
यहांँ तो कोई, अपने ही दूर छोड़ जाते हैं ।
.....
मैंने यह लाइने उस पक्ष में लिखा है जब हम किसी भी कार्य हो या प्रेम हो या पति पत्नी का साथ हो या दोस्ती का साथ हो हम जो भी काम करते हैं या जो भी दोस्ती व्यक्त करते हैं और हम साथ साथ लेकर रिश्तो को चलते रहते हैं पर अचानक कुछ ऐसा होता है की मजबूरियों के चलते हमें रास्ते अलग अलग करना पड़ता है और उस पल में जो मन में दुख होता है उस दुख को लिख पाना बड़ा कठिन होता है बस्र्थ मैंने कोशिश की इन चार लाइनों में उस समस्त दुख को समेटने की उम्मीद करता हूंँँ,आपको यह लाइनें बेहद पसंद आएंगी अगर आप हिंदी की पसंदीदा कविता पढ़ते हो तो जरूरी नहीं है कि हर एक बात की गहराई तक उतर के लिखा जाए फिर भी मैंने कोशिश की है इन चार लाइनों में लिखने की ....
(दिलीप पटले)
कैसे अजनबी रास्ते है।
कैसे अजनबी रास्ते है ,
जो मंजिल मे साथ चलकर,
अधूरे में छोड़ जाते हैं ।
यहांँ किसको कहें अपना -अपना।
यहांँ तो कोई, अपने ही दूर छोड़ जाते हैं ।
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मैंने यह लाइने उस पक्ष में लिखा है जब हम किसी भी कार्य हो या प्रेम हो या पति पत्नी का साथ हो या दोस्ती का साथ हो हम जो भी काम करते हैं या जो भी दोस्ती व्यक्त करते हैं और हम साथ साथ लेकर रिश्तो को चलते रहते हैं पर अचानक कुछ ऐसा होता है की मजबूरियों के चलते हमें रास्ते अलग अलग करना पड़ता है और उस पल में जो मन में दुख होता है उस दुख को लिख पाना बड़ा कठिन होता है बस्र्थ मैंने कोशिश की इन चार लाइनों में उस समस्त दुख को समेटने की उम्मीद करता हूंँँ,आपको यह लाइनें बेहद पसंद आएंगी अगर आप हिंदी की पसंदीदा कविता पढ़ते हो तो जरूरी नहीं है कि हर एक बात की गहराई तक उतर के लिखा जाए फिर भी मैंने कोशिश की है इन चार लाइनों में लिखने की ....
(दिलीप पटले)
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