Best poem जिंदगी आपकी शायद - हिन्दी कविताएं- दिल के करीब

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Sunday, 26 April 2020

Best poem जिंदगी आपकी शायद

जिंदगी आप कि शायद


कौन जाने फसाने कितने हैं।
 कौन जाने बहाने कितने हैं ।
जाने कैसी जिंदगी हो गई।
 राह भी कोई अजनबी हो गई ।
जब समय था करीब तो ,
पकडना ना सिखे
जब खोली हथेलियाँ तो ,
सारी खुशियाँ ही दुर हो गई ।
-दिलीप पवार

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