Wednesday, 1 April 2020
मेरे अपने
मेरे अपने सपने
मेरे अपने हौंसले औखात से परे चलते है ।
मै जमी पे पैर रखता हूँ।
वो उन्हे ही आस्मा समझ लेते है।
ऐसा नही की ,
मै, गिर कर संभलता नही।
अक्सर इसी अंदाज मे,
मेरे सपने हकीगत मे बदलते है।
-Dileep pawar
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