(बस आप की याद मे )
Hindi poem
कैसे अजनबी रास्ते है ।
कैसे अजनबी रास्ते है ।
जो मंजील मे साथ चलकर
जो मंजील मे साथ चलकर
अधुरे मे छोड जाते है।
यहाँ किसको कहे अपना,अपना
यहाँ तो कही अपने ही दुर छोड जाते है ।
यहाँ तो कही अपने ही दुर छोड जाते है ।
(दिलीप पंवार)
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